ऐसी रेखा वालों के संतान सुख में आती है कमी

ऐसी रेखा वालों के संतान सुख में आती है कमी

यदि कनिष्ठिका उंगली के उद्‌गम स्थल पर जाल जैसा चिन्ह निर्मित हो रहा हो, तो यह संतान प्राप्ति सवाल जवाब में कुछ विलंब या संतान सुख में कुछ कमी का संकेत है, ऐसा हस्त रेखा विज्ञान के नियम कहते हैं।

भविष्य का आईना है आपके नाम का प्रथम अक्षर (O)
O नाम के लोग अपने आंतरिक गुणों के कारण फर्श से अर्श तक का सफर तय करते हैं। मौका आने पर ये अपनी क्षमता से जगत को चकित कर देते हैं। ये सामान्य रूप से जरा शर्मिले स्वभाव के होते हैं। इनके कमाल का आकर्षक पाया जाता है। ये बहुत ज्यादा ऊर्जावान होते हैं। जीवन में ये उच्च पदों पर विराजते हैं। रिश्तों के प्रति ये बहुत सजग होते हैं। प्रेम और भावनाओं का इनके लिए विशेष अर्थ होता है। परिवार की ये धुरी होते हैं। ये सबको लेकर साथ चलने का प्रयास करते हैं। थोड़े संघर्ष के बाद जिंदगी में नाम, रुतबा, समृद्धि, और कामयाबी इन्हें सबकुछ हासिल होती है। ये बेहद संवेदनशील और भावुक होते हैं। इनके स्वभाव में अक्सर उग्रता और हड़बड़ाहट परिलक्षित होती है। पुरानी अप्रिय बातों को भूलना इनके लिए सहज नहीं होता।

प्रश्न: मेरे पति मुझसे प्यार बहुत करते हैं, पर उनके साथ रहने का मन नहीं करता। क्या करूं? जन्म तिथि- 11.04.1992, जन्म समय- 04.29, जन्म स्थान- कल्याण।

उत्तर: सद्‌गुरुश्री कहते हैं कि आपकी राशि कर्क और लग्न मकर है। मंगल आपकी कुंडली में लग्न में बैठकर आपको मांगलिक तो बना ही रहा है, साथ में बृहस्पति सप्तम भाव में बैठकर आपके दांपत्य जीवन को नाटकीय रूप से प्रभावित कर रहा है। गुरु पर राहु की दृष्टि भी आपके वैवाहिक जीवन पर उल्टा प्रभाव डाल रही है। समस्या के पूर्ण आकलन के लिए आपके पति की कुंडली का अध्ययन भी जरूरी है। पर आपको अपने जज्बात पर काबू पाने का और स्वभाव की नाटकीयता से बचने का प्रयास अनिवार्य रूप से करना होगा। पति के साथ मिलकर बात करें। अलग रहने का विचार समस्या को विकराल बना सकता है। मान्यताएं कहती हैं कि मस्तक, नाभि व जिह्वा पर केसर युक्त जल का लेप, गुरुवार को चने व केले का दान तथा कुत्तों को मीठी तंदूरी रोटी खिलाने से लाभ होगा।

प्रश्न: क्या नीचभंग एक निकृष्ट और बुरा करने वाला योग है?
उत्तर: हर्गिज नहीं। बल्कि, नीचभंग तो एक उत्तम राजयोग है। ज्योतिषीय ग्रंथों ने इस योग की बहुत प्रशंसा की है। सद्‌गुरुश्री कहते हैं कि जब कुंडली में षष्ठ, अष्टम और व्यय भाव के मालिक इन्हीं घरों में आसीन हों, तो यह राजयोग निर्मित होता है। यह योग समाज, राज्य और राष्ट्र में बड़ी प्रतिष्ठा का सबब बनता है। शासन, प्रशासन और राजनीति में यह योग उच्च पद प्रदान करता है। यह जीवन में अपार ख्याति देता है। नीचभंग के लिए जो ग्रह उत्तरदायी होता है, उस ग्रह से संबंधित कार्यक्षेत्र में बड़ी कामयाबी मिलती है।


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